Calendars or Almanacs: तिथि-पत्र या कैलेंडर

तिथि-पत्र या कैलेंडर

ग्रेगोरियन कैलेंडर दुनिया का सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला नागरिक कैलेंडर है जो सारणीबद्ध है और नक्षत्रों के अनुसार आधारित नहीं होता है। सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की क्रांति 365.2422 दिन में संपन्न होती है। इस 0.2422 दिन का हिसाब करने के लिये प्रति 4 वर्षों में फरवरी माह में 1 दिन जोड़ 28 की जगह 29 दिन कर दिये जाते हैं जिसे लीप वर्ष कहा जाता है। लेकिन हर 4 वर्ष में 1 दिन जोड़ने से 0.0078 प्रति वर्ष अधिक जुड़ जाता है। उसे ठीक करने में हर 100 वें वर्ष को लीप वर्ष नहीं किया जाता लेकिन हर 400वें वर्ष को लीप वर्ष कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए वर्ष 1604, 1608, 1612 … लीप वर्ष हैं पर वर्ष 1700, 1800 और 1900 लीप वर्ष  नहीं हैं; लेकिन वर्ष 2000 लीप वर्ष है। आने वाले समय में वर्ष 2020, 2024, 2028 … लीप वर्ष हैं पर वर्ष 2100, 2200 और 2300 लीप वर्ष नहीं हैं; लेकिन वर्ष 2400 लीप वर्ष है।

हिन्दू कैलेंडर की तिथियां ग्रेगोरियन कैलेंडर से भिन्न होती हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर के विपरीत जो बारह चंद्र चक्र (354 चंद्र दिन) और लगभग 365 सौर दिनों के बीच विसंगति को समायोजित करने के लिए चंद्र महीने में अतिरिक्त दिन जोड़ता है, हिंदू कैलेंडर चंद्र महीने की अखंडता को बनाए रखता है,  लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि त्यौहार और फसल से संबंधित अनुष्ठान उचित मौसम में आते हैं, हर तीन वर्षों में जटिल नियमों से एक अतिरिक्त पूर्ण महीना जोड़ता है । इस अतिरिक्त पूर्ण महीने को पुरुषोत्तम मास कहा जाता है।

हिन्दू कैलेंडर परंपरागत रूप से भारत में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न क्षेत्रीय चंद्रमा-सूर्य कैलेंडर के लिए एक सामूहिक शब्द है। वे टाइमकीपिंग के लिए एक समान अंतर्निहित अवधारणा अपनाते हैं, लेकिन चंद्रमा चक्र या सूर्य चक्र के सापेक्ष महत्व में भिन्न होते हैं। नए साल को कब शुरू माना जाये तथा महीनों के नामों में भी भिन्नता है। हिन्दू कैलेंडर वैदिक ज्ञान से जुड़े हैं; खगोल-विज्ञान व ज्योतिष-शास्र का अभिन्न हिस्सा रहे हैं और 6000 वर्षों से अधिक पुराने हैं।

हिन्दू कैलेंडर अपनी स्वयं सुधारक क्षमता के चलते, ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुकाबले भूगौलिक व नक्षत्रीय टाइमकीपिंग के लिए अधिक शुद्ध व यथार्थ-वादी है। हिंदू त्यौहारों की तिथी चंद्रमा की स्थिति पर आधारित हिंदू कैलेंडर से आंकलित की जाती है; जिसके चलते हिंदू त्यौहार हर वर्ष ग्रेगोरियन कैलेंडर की विभिन्न दिनांकों पर पड़ते हैं।

एक सच्चे और मजबूत हिंदू वैदिक कैलेंडर के स्थान पर एक गलत और कमजोर ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग, आक्रामकों द्वारा छोड़ी गयी एक शाही विरासत नहीं अपितु छलावा है, जिसे हम  भारतीय, “अंतरराष्ट्रीय मानकों” के नाम पर जारी रखे हुए हैं।

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English version follows:

अंग्रेज़ी संस्करण आगे है:

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Calendars or Almanacs

The Gregorian calendar is the world’s most widely used citizen calendar which is tabular and not founded according to the constellations. Earth’s revolution around the Sun takes 365.2422 days. Each year is typically taken as 365 days. In order to account for this 0.2422 days, 1 day is added to February every 4 years and the year with February having 29 days instead of 28 days is called a Leap Year. But adding 1 day every 4 years adds an extra 0.0078 day a year. Every 100th year is thus not a leap year in correcting this extra, but for further correction, every 400th year is a leap year. For example 1604, 1608, 1612 … were leap years, but the year 1700, 1800 and 1900 were not leap years; yet the year 2000 was a leap year. In the coming years 2020, 2024, 2028 … are leap years, but the years 2100, 2200 and 2300 are not leap years; yet the year is 2400 will be a leap year.

The dates of the Hindu calendar are different from the Gregorian calendar. Unlike the Gregorian calendar, which adds an extra day in the every lunar month to adjust the discrepancy between the twelve lunar chakra (month – 354 moon days) and about 365 solar days, the Hindu calendar maintains and ensures the integrity of the lunar month. In order to ensure that the festivals and customs related to crops fall in the proper season, an extra full month is added once in every three years adds through a set of complex rules. This extra month is called “Purushottam” Maas (month).

Hindu calendar is a collective term for traditional regional moon-sun calendars used in India customarily. They adopt a similar underlying concept for timekeeping, but the relative significance between the the Moon cycle and the Sun cycle varies. There are differences in names of months and the commencement of New Year also. Hindu calendars are associated with Vedic knowledge; and have been an integral part of Astronomy and Astrology for more than 6,000 years.

Because of its self correcting ability, the Hindu calendar is more pure and precocious for geographical and constellation timekeeping than the Gregorian calendar. The dates of Hindu festivals are calculated from the Hindu calendar based on the position of the moon; because of which Hindu festivals fall on different dates of the Gregorian calendar every year.

Use of an inaccurate and frail Gregorian calendar in place of a more truthful and robust Hindu Vedic calendar is an Imperial legacy inflicted by the aggressors which we, the Indians, continue to tag along in the name of “international standards.”

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Published by

Mukul Gupta

*Educator, researcher, author and a friendly contrarian* Professor@MDIGurgaon

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